**वाराणसी न्याय प्रणाली और कानून के प्रति विश्वास को और मजबूत करने वाली एक अनूठी घटना में रामेश्वर स्थित श्री युगल बिहारी इंटर कॉलेज के प्रधान लिपिक सुनील द्विवेदी को अपनी सेवानिवृत्ति के अंतिम दिन न्याय मिला। इलाहाबाद हाईकोर्ट के कड़े रुख और स्पष्ट आदेश के बाद 30 सितंबर 2026 को सह जिला विद्यालय निरीक्षक की मौजूदगी में उन्होंने पुनः प्रधान लिपिक के पद पर कार्यभार ग्रहण किया।
### निलंबन से हाईकोर्ट तक का पूरा प्रकरण
उल्लेखनीय है कि सुनील द्विवेदी को 15 दिसंबर 2025 को निलंबित कर आरोप पत्र थमाया गया था, जिसका उन्होंने साक्ष्यों के साथ जवाब प्रस्तुत किया। इसके बावजूद प्रबंध समिति ने विभागीय जांच का हवाला देते हुए उन्हें प्रधान लिपिक पद से पदावनत (डेमोट) कर सहायक लिपिक बना दिया था।
इस निर्णय के खिलाफ जब मामला जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS), वाराणसी के पास पहुंचा, तो उन्होंने उपलब्ध अभिलेखों एवं साक्ष्यों के आधार पर 11 जून 2026 को प्रबंध समिति के फैसले को खारिज कर दिया और सुनील द्विवेदी को प्रधान लिपिक पद पर बहाल करने का आदेश जारी किया।
### हाईकोर्ट के निर्देश पर अंतिम दिन मिला अधिकार
DIOS के स्पष्ट आदेश के बाद भी विद्यालय प्रबंधन द्वारा उन्हें कार्यभार ग्रहण कराने में टालमटोल की जा रही थी। मामला आखिरकार इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंचा। मामले की गंभीरता को देखते हुए माननीय हाईकोर्ट ने 28 सितंबर 2026 को सख्त रुख अपनाते हुए सुनील द्विवेदी का कार्यभार सुनिश्चित कराने के आदेश दिए।
हाईकोर्ट के आदेश का अनुपालन करते हुए 30 सितंबर 2026—जो कि सुनील द्विवेदी की सेवानिवृत्ति की तिथि भी थी—को सह जिला विद्यालय निरीक्षक, वाराणसी की उपस्थिति में उन्हें सम्मानपूर्वक प्रधान लिपिक पद का कार्यभार ग्रहण कराया गया।
### धार्मिक अनुष्ठान के साथ ली विदा
कार्यभार संभालने के तुरंत बाद और अपनी सेवानिवृत्ति के पावन अवसर पर सुनील द्विवेदी ने रामेश्वर मंदिर परिसर में संत श्री युगल दास जी एवं श्री बिहारी दास जी की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण किया। इसके पश्चात उन्होंने भगवान भोलेनाथ के मंदिर में मत्था टेककर आशीर्वाद प्राप्त किया।
स्थानीय लोगों और विभागीय कर्मियों ने इसे सत्य और न्याय की जीत बताते हुए कहा कि सेवानिवृत्ति के अंतिम दिन मिला यह न्याय प्रशासनिक और न्यायिक व्यवस्था में आमजन का भरोसा और गहरा करता है।