वाराणसी. हिन्दू धर्म, संस्कृति एवं समाज की बन्धुता, परस्पर प्रेम, सहयोग तथा स्वाभिमान के संरक्षण हेतु कार्यक्रम का आयोजन रविवार को दुर्गाकुंड स्थिति दीनदयाल उपवन में किया गया जहां समाज के हर वर्ग के लोग शामिल रहे.
धर्म नगरी काशी के दुर्गाकुंड स्थित दीनदयाल उपवन में रविवार को हिंदू धर्म, संस्कृति और आपसी भाईचारे के संरक्षण हेतु एक विशाल कार्यक्रम का आयोजन किया गया. कार्यक्रम में वक्ताओं ने जाति-पाति के बंधनों को तोड़कर संगठित होने और अपनी सांस्कृतिक विरासत को बचाने पर जोर दिया.
कार्यक्रम के मुख्य वक्त के रूप में पहले अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय मंत्री जितेन्द्र नन्द सरस्वती ने कहा जात पात से अलग कर एकत्रित होकर हिंदुओं को समेट ले .

इसके बाद संबोधित करते हुए नगर निगम के सेवानृत विजय चौधरी ने कहा हम सब हिंदू समाज के अभिन्न अंग है, जमे समझ के हर वर्ग के साथ चलना है, हम सबको सावधान रहना होगा . आज हमारे देवी देवताओं के ऊपर अभद्रता करने वाले पर एक्यूट होकर विरोध करना हैं. आइए हम सब मिलकर कर संकल्प ले एक रहे.
राजस्व विभाग की उपायुक्त कनक तिवारी ने होलकर का जिक्र करते हुए ने नारियों के लेकर का कहा विवेक को जागृत करने की और केंद्र. नारियों को जन्म देने वाली है,हमें भी अपने अपने बच्चों को नैतिक मूल्यों और अपने संस्कृत को बताना पड़ेगा जिससे आगे आने वाली पीढ़ियां केंद्रित होंगी. जिससे समाज विकसित हो.

काशी विदूत परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री राम प्रकाश द्विवेदी ने कहा मात्रा ज्ञान एकत्रित हुए हैं अभिमन्यु के विराजमान आज के कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे आदरणीय भूपेंद्र वालिया जी कहते हैं जब सभ्यमिति को सभा शोभा को नहीं पाती है जी सभा में स्थान विरुद्ध ना हो तो इस तरह से हमारी वाली इस कार्यक्रम की शोभा का संवर्धन कर रहे हैं. हम उनका आदर करते हैं अभिनंदन करते हैं मंच पर विराजमान पूज्य संत संत के बिना भारत की भव्यता और दिव्यता परम वैभव को प्राप्त किया जा सकता है. पूज्य संतों का जब तक आशीर्वचन प्राप्त हो ऐसे पूज्य संत बड़ा शीतल दास अखाड़ा के महंत रामशरण दास जी महाराज मातृशक्ति के बिना तो सृष्टि ही अधूरी है . इसलिए मातृ शक्ति के रूप में मातृ शक्ति का प्रतिनिधित्व कर रही कनक तिवारी जी आदरणीय श्री विजय चौधरी जी मेरे समझ विराजमान सभी श्रेष्ठ जन्म आप सबको मेरा सादर वंदन अभिनंदन और नमन कुशल संचालक संचालक किसी भी कार्यक्रम का मेरुदंड होता है. कुशल संचालक जब सूत्र पाठ करता है तो वक्त उसी के आधार पर अपनी वाणी को अग्रसारित करता है ऐसे कुशल संचालक रवि जी है हिंदू एकता इस तरह के कार्यक्रमों की आवश्यकता है क्यों पड़ी और इस तरह के कार्यक्रमों को करने के पीछे आज क्योंकि हमारे शास्त्रों में लिखा है. प्रयोजन अनुदेशक प्रवर्तते बिना किसी प्रयोजन के बिना मंडवान मूड पशु पक्षी भी किसी कार्य में प्रयुक्त नहीं होता है . तो हम आज इतनी भारी संख्या में आप सब लोग रविवार का दिन आनंद का दिन होता है 7 दिन में एक दिन अवकाश का समय मिलता है और उसे सीट के लिए प्रचंड प्रवाह मां शीतलता में हम सब इस स्थान पर एकत्रित हैं इससे निश्चित हो रहा है सुनिश्चित हो रहा है कि हमारे मन में सशक्त भारत के निर्माण के प्रति एक संकल्प जागृत हो रहा है और वह सशक्त भारत समर्थ. भारत तभी होगा जब हम संगठित होंगे इस संगठन को लेकर के इस एकत्रीकरण को लेकर के इस तरह के कार्यक्रम पूरे राष्ट्र में आप हम सब के द्वारा आप हम सबके भाई- बांधों के द्वारा ही आयोजित हो रहे हैं और आप हम सब इनका सफल आयोजन कर पा रहे हैं देख पा रहे हैं , सुन पा रहे हैं उसके पीछे निश्चित ही हमें कह सकते हैं कि आज अगर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ नहीं होता तो पता नहीं हम माथे पर चंदन और सर पर शिखा भी रख पाते कि नहीं रख पाते जिस तरह की विकराल विषम परिस्थितियों से हम जूझ रहे हैं हमारा राष्ट्र जूझ रहा है. बाहर तो दिखाई दे रहा है कि हमें किन से लड़ना है लेकिन जो हमारे आपके साथ हैं हमारे आपके राष्ट्र में रह रहे हैं. हमारी राष्ट्र की वायु ले रहे हैं हमारे इस राष्ट्र की उपलब्धि और इस राष्ट्र की सुविधाओं को प्राप्त कर रहे हैं वह भी हमारे साथ विश्वासघात कर रहे हैं भगवान मर्यादा पुरुषोत्तम राम ने कहा था लक्ष्मण से कि हमें भाई उसे रावण से ज्यादा उन लोगों से धड़क हमारे साथ चल करके चले जाते हैं हम जिसको जिज्ञासा जब हमारे मन में स्थापित हो जाती है तो उसे तो हम सावधान रह सकते हैं पर हमारा मित्र अगर सत्य. बुद्धिमान बुद्धिमान की बुद्धि भी मालिन हो जाती है क्यों असंभव है लेकिन भगवान मर्यादा पुरुषोत्तम राम को जानकी जी बार-बार कहती है कि हमें यह ब्रिज चाहिए क्यों प्राप्त हो रही थी तो इस तरह से कभी-कभी हमारे सामने खड़ी हो जाती हैं. उन परिस्थितियों के शिकार आवश्यकता है हम आपको उन परिस्थितियों से बचने के लिए उन परिस्थितियों को जानने के लिए हिंदू किसे कहेंगे हिंदू है . कौन पवित्र पूर्ण सलिल भारत भूमि में जन्म लिया है जो इसको मातृभूमि मानता है . जो इसको पितृ भूमि मानता है जो इसको पूर्ण भूमि मानता है और जिसको आत्म गौरव का सम्मान है भारत मां के प्रति नतमस्तक है वही हिंदू है जिनको हमारे ऋषि मुनियों पर विश्वास है वही सनातन धर्म और लंबी हिंदू है और व्यापकता की ओर जाएंगे तो जैन है बहुत है यह व्यवस्थाएं जो हमारी बनी हुई है जो संक्रमण कर दिया है मैं बहुत इतिहास की चर्चा नहीं करूंगा बहुत गहनता से पुराने और धर्म शास्त्रों की चर्चा नहीं करूंगा आप सब चिंतन करिए आप हम सब ने देखा होगा. आज से 40 वर्ष के पूर्व के भारत की परिकल्पना करिए हम अपने पड़ोसी के प्रति कितने संवेदनशील थे हम अपने मोहल्ले में कितने संवेदनशील थे हम अगर मोहल्ले में निकलते थे तो मोहल्ले का अगर बुजुर्ग कबीर नगर खड़े हैं तो 18 साल का 14 साल का लड़का रास्ता करके धीरे से निकल जाता था दिखाई देंगे तो मरेंगे और डांटेंगे. आप देखिए कोई छेड़खानी भी नहीं होती थी यह परिस्थितियों इस प्रकार के संस्कार हमारे अंदर कहां से पैदा हो गए जब भारत रत्न मदन मोहन मालवीय जी विश्वविद्यालय की स्थापना कर रहे थे उनका संकल्प था एक स्थान पर सभी लोग पढ़ेंगे सभी लोग जाएंगे सुंदरलाल जी ने उनसे चर्चा की और कहां की बच्चियों का अलग स्थान रखिए और बच्चों को अलग रखिए आने वाले समय में इस तरह होगी कि हमें इतनी सुरक्षा और इतनी व्यवस्थाएं देनी पड़ेगी मा बनाने का स्वतंत्रता में विद्यालय दे सकता हूं लेकिन साथ में पढ़ेंगे साथ में आएंगे इसके लिए मैं निषेध नहीं करूंगा अगर मेरी शिक्षण संस्थान में इस तरह की अगर कोई भावना लेकर के आता है तो फिर मुझे इस तरह के विश्वविद्यालय बनाने की जरूरत नहीं है.

कार्यक्रम की अध्यक्षता सिख संगत के पूर्व संयोजक भूपेंद्र वालिया के द्वारा किया गया. कार्यक्रम का संचालन रवि खन्ना और कार्यक्रम के संयोजक ज्ञानेश्वर जायसवाल ,सह संयोजक विनय राय और नारायण गुप्ता ने किया.
कार्यक्रम में मुख्य रूप से नवीन श्रीवास्तव, अनुराग,विजय गणोरकर, विनीत सिंह, संजय वर्मा ,क्रांति , दिनेश ,आशीष, शांतनु ,श्वेताभ आदि शामिल रहे.
