वाराणसी मे महिलाओं ने बढ़ती हुई महंगाई पर केंद्र सरकार को जबरदस्त घेरा, प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र को

Amit Gupta
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वाराणसी। महानगर महिला कांग्रेस कमेटी द्वारा बढ़ती महंगाई व गृहणियों की चिंता के संदर्भ में एक पत्रकार वार्ता कांग्रेस पार्टी कर्यालय पर संपन्न हुआ पत्रकार वार्ता में महानगर अध्यक्ष राघवेंद्र चौबे जिलाध्यक्ष महिला कांग्रेस अनुराधा यादव व महिला महानगर अध्यक्ष पूनम विश्वकर्मा ने पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए बताया कि “बढ़ती महंगाई” आज नरेंद्र मोदी सरकार की विफल नीतीयों के कारण “बढ़ती महंगाई” का साया भारतीय घरों पर गहराया गया है और इसका सबसे अधिक असर गृहणियों पर पड़ रहा है। ये अनसुनी नायिकाये जो परिवार वित्त और कल्याण के बीच संतुलन बनाती हैं।..

मूल्य वृद्धि निम्न है

1 – सब्जियां : टमाटर, जो कभी खाने की मुख्य चीज हुआ करता था, उसकी कीमत लगभग

दोगुनी हो गई है, ₹40/kg से₹70/kg तक। प्याज़ की कीमत भी आसमान छू रही ,जो ₹20/kg से₹35/kg तक पहुुंच गई है।यहां तक की आलू की कीमत भी ₹15/kg से बढ़कर ₹25/kg हो गई है।

2 –एलपीजी : अनगिनत रसोइयों की जीवन रेखा, एलपीजी ससलेंडर की कीमतें पिछले कुछ सालों में बड़कर आज ₹1050 तक पहुुंच गई हैं। यह वृद्धि बजट पर काफी दबाव डालती है,जिससे परिवार को गैस के उपयोग में कटौती करने के लिए मजबूर होना पड़ता है।

3 – दाले:- प्रोटीन का एक महत्वपूर्ण स्रोत की कीमत में तेज वृद्धि देखी गई है। मूुंग दाल जो एक लोकप्रिय विकल्प है।इसकी कीमत ₹70/kg सेबढ़कर ₹90/kg हो गई है। अरहर दाल जो कई क्षेत्रीय व्यंजनों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है उसकी कीमत में ₹100/kg से ₹130/kg तक पहुुंच गई है।

4 –तेल: – खाना पकाने का तेल जो रसोई की एक जरूरी चीज है, इसकी कीमत लगातार बढ़ रही है। व्यापक रूप से इस्तेमाल किये जाने वाला तेल सूरजमुखी तेल इसकी कीमत ₹120/लीटर से बढ़कर ₹150/लीटर हो गई है, जबकी सरसों का तेल में और अधिक तेजी से वृद्धि देखी गई जो ₹180/लीटर से₹220/लीटर तक पहुुंच गई है।

कठोर वास्तविकता

घटते बजट – खाद्य पदार्थो ईंधन और बुनियादी जरूरतों जैसी आवश्यक वस्तुओं की बढ़ती कीमतें आय वृद्धि को पछाड़ रही हैं,जिससे गृहणियों के बजट सिकुड़ रहे है।

मुश्किल विकल्प – उन्हें कई कठिन विकल्पों का सामना करना पड़ता है अपनी खुद की जरूरतों का त्याग या करना या अपने परिवार के लिए भोजन स्वास्थ सेवा व शिक्षा की गुणवक्ता व मात्रा कम करना पड़ता है। मानसिक व भावनात्मक तनाव सीमित साधनों में प्रबंध करने का लगातार दबाव व बढ़ती कीमतों की चिंता के साथ मिलकर गृहणियों की मानसिक व भवनात्मक स्वास्थ पर भारी पड़ रहा है।

वाराणसी ब्यूरो चीफ अमित गुप्ता

    (उत्तम सवेरा न्यूज) 

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