भाजपा सरकार ने बिलकिस बानो के 11 बलात्कारियों एवं उसके अजन्मे बच्चे के हत्यारों को रिहा कर दिया।

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वाराणसी। एक तरफ 15 अगस्त 2022 को लाल किले के प्राचीर से प्रधानमंत्री ने नारी सम्मान एवं नारी उत्थान की बात कही थी और उसी दिन दूसरी तरफ़, गुजरात की भाजपा सरकार ने बिलकिस बानो के 11 बलात्कारियों एवं उसके अजन्मे बच्चे के हत्यारों को रिहा कर दिया। अपराधियों को प्री मेच्योर रिलीज कमिटी द्वारा रिहा किया गया, जिसमे स्थानीय भाजपा विधायक, नगरसेवक और आर एस एस के कार्यकर्ता शामिल थे।

इन अपराधियों को भाजपा , आर एस एस और उसकी विचारधारा से जुड़े संगठनों द्वारा माला पहनाकर स्वागत किया गया। बिलकिस बानो के गुनहगारों को रिहा कर दिया जाना देश की न्याय व्यवस्था पर एक बड़ा सवालिया निशान है। क्‍या इस देश में किसी समुदाय विशेष का होना अपराध है ? क्‍या किसी मुजरिम का किसी विशेष समुदाय से होने पर उसके गुनाह माफ़ हो जाता है। ऐसी घटनाए हमारी समृद्ध विरासत पर धब्बा हैं। देश में हर दिन समानता, न्याय और धर्मनिरपेक्ष मूल्यों को कुचला जा रहा है और सबसे दुर्भाग्यपूर्ण बात यह है कि यह सब सरकार के संरक्षण में किया जा रहा है। बिलकिस बानो मामले में सरकार का कदम उसके बहुसंख्यकवादी एजेंडे के अनुरूप है और इसीलिए भाजपा नेताओं द्वारा इसकी प्रशंसा की जा रही है। साम्प्रदायिक नफरत भारत के लिए एक गंभीर चुनौती है । हम देख रहे हैं कि कैसे सरकार द्वारा संस्थानों का इस्तेमाल भारत के लोगों की सेवा करने के बजाय अपने सांप्रदायिक एजेंडे को स्थापित करने और फैलाने के लिए किया जा रहा है। हम सांप्रदायिक नफरत , हिंसा . और जनविरोधी नीतियों की राजनीति को खारिज करते हैं। हम बिलकीस बानो के लिए न्याय चाहते हैं। और सभी 11 अपराधियों की समयपूर्ण रिहाई का फैसला वापस लेने की मांग करते हैं। सरकार के साथ साथ इस देश की न्यायपालिका भी लगातार ऐसे वक्तव्य और आदेश दे रही है, जो महिलाओं के साथ हो रहे अपराधों को बल प्रदान कर रहें हैं। पिछले दिनों केरल हाइकोर्ट के न्यायाधीश द्वारा महिलाओं के साथ हुए रेप के एक केस की सुनवाई के दौरान कई संवेदनहीन स्टेटमेंट कोट किये गए जो घरेलू हिंसा और बलात्कार जैसे घिनौने व अमानवीय कृत्यों को बढ़ावा देंगे। न्यायाधीश ने रेप को जायज ठहराते हुए कहा कि महिलाओं के उकसाऊ परिधान रेप को बैधता प्रदान करते हैं। लोकतंत्र के स्तंभों की जड़ में ऐसे महिला विरोधी विचारों का पलना बढ़ना समाज व मानवता के लिए एक खतरा है।

हमारी मांगें
* बिलकिस के दोषियों की रिहाई तत्काल प्रभाव से निरस्त हो।

* न्यायलय की अवमानना के जुर्म में गुजरात सरकार द्वारा गठित कमिटी की जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हो!

सभी उच्च न्यायालय को महिलाओं के प्रति हिंसा के केसेस की सुनवाई के दौरान संवेदनशीलता बरतने के लिए निर्देशित किया जाए।

* 27 फरवरी 2002 को गोधरा स्टेशन के पास साबरमती एक्सप्रेस में आग लगा दी गई, इस घटना के बाद 28 फरवरी 2002 को गुजरात में दंगे भड़क उठें।

* दंगो की आग 3 मार्च 2002 को बिलकिस के घर पहुंच गई। तीन साल की छोटी बच्ची सहित बिलकीस बानो के पूरे परिवार पर हथियारों से लैस भीड़ ने हमला बोल दिया था।

* दंगाईयों ने बिलकिस, उनकी मां और परिवार के तीन अन्य महिलाओं के साथ सामूहिकदुष्कर्म किया। हमले में परिवार के 17 में से 7 सदस्यों की मौत हो गई, छह लापता हो गए।

इस घटना के वक्त बिलकिस पांच महीने की गर्भवती थीं और केवल घर में तीन लोगो की जान बच सकी जिसमे बिलकिस, उनके परिवार का एक पुरुष और एक तीन साल का बच्चा शामिल था।

घटना के बाद बिलकिस लिमखेड़ा पुलिस स्टेशन पहुंचीं। सीबीआई के मुताबिक शिकायत दर्ज करने वाले हेड कांस्टेबल सोमाभाई गोरी ने भौतिक लथ्यों को दबाया और बिलकिस की शिकायत को तोड़ मरोड़ कर लिखा। उन्हें मेडिकल जांच के लिए सरकारी अस्पताल भी तब ले जाया गया जब वो दंगा राहत कैंप में पहुंची। राष्टीय मानवाधिकार आयोग और सुप्रीम कोर्ट के दखल के बाद बिलकिस का मामला सीबीआई को जांच के लिए सौंपा गया।

जनवरी 2008 में सीबीआई की फास्ट टैक कोर्ट ने मामले में संलिप्त सभी 11 आरोपियों को उम्रकैद की सज़ा सुनाई। 15 अगस्त 2022 को गुजरात सरकार ने एक कमिटी बनाकर सभी दोषियों की सजा माफ करते हुए रिहा कर दिया। आज जब हमारा भारत देश अपनी आज़ादी के 76वें साल का जश्न मना रहा है। मौजूदा सरकार आज़ादी का अमृत महोत्सव मना रही है, करोड़ों रूपए के मीडिया कैंपेन के जरिए इसे एक बड़ा आयोजन बना रही है पर इसके विपरीत इन सब के बीच राष्ट्रीय आंदोलन और स्वतंत्रता के जिन मूल्यों के खातिर हमारे पूर्वजों ने अपनी कुर्बानी दी थी, वो नष्ट हो रहे हैं।

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