लखनऊ. भारतीय जनता पार्टी के उत्तर प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष को लेकर लंबे के मंथन के बाद शनिवार को प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने नामांकन पत्र दाखिल कर दिया है. नामांकन प्रक्रिया के दौरान पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की भारी मौजूदगी ने देखी गई. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य, बृजेश पाठक, मंत्री जेपीएस राठौर, पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी नामांकन प्रक्रिया के दौरान मौजूद रहें. इस दौरान चुनाव पर्यवेक्षक एवं राष्ट्रीय महामंत्री विनोद तावड़े की भी मौजूदगी देखने को मिली.

कौन हैं पंकज चौधरी?
पंकज चौधरी भाजपा के गद्दावर नेता और सात बार के सांसद हैं पंकज चौधरी उत्तर प्रदेश के महाराजगंज लोकसभा क्षेत्र से भाजपा के सांसद हैं. पार्टी संगठन में लंबे समय से सक्रिय रहने और पूर्वी यूपी में मजबूत पकड़ के कारण उन्हें इस पद के लिए सबसे मजबूत दावेदार माना जा रहा है. महाराजगंज से सांसद पंकज चौधरी के घर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी 2023 में गोरखपुर प्रवास के दौरान पहुंचे थे.
महज 27 साल में बन गए थे सांसद
पंकज चौधरी साल 1989 में राजनीतिक करियर की शुरुआत की थी। योगी के गढ़ यानी गोरखपुर से पहली बार नगर निगम का पार्षद व डिप्टी मेयर का चुनाव जीत थे. उसके बाद 1991 के लोकसभा चुनाव में भाजपा की तरफ से महराजगंज लोकसभा सीट पहला चुनाव लड़ा था. पंकज चौधरी महज 27 साल की उम्र में पहली बार सांसद चुने गए.
लंबा है प्रशासनिक अनुभव
केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री: उन्हें जुलाई 2021 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मंत्रिमंडल विस्तार के दौरान केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री (Minister of State for Finance) बनाया गया था, जहाँ उन्होंने महत्वपूर्ण प्रशासनिक अनुभव प्राप्त किया.
पहले के पद: लोकसभा सांसद बनने से पहले, उन्होंने स्थानीय निकाय की राजनीति में भी काम किया है. वह गोरखपुर शहर के महापौर (Mayor) रह चुके हैं.
इन वजह से बनाया गया प्रदेश अध्यक्ष
1.ओबीसी वोट बैंक पर पकड़: वह कुर्मी (OBC) समुदाय से आते हैं, जो उत्तर प्रदेश में यादवों के बाद दूसरा सबसे बड़ा और प्रभावी ओबीसी समूह है. उन्हें अध्यक्ष बनाकर भाजपा ने स्पष्ट संदेश दिया है कि वह गैर-यादव ओबीसी वोट बैंक को मजबूती से अपने साथ रखना चाहती है.
2. सपा के पीडीए को जवाब: समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव लगातार ‘पीडीए’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) का नारा देकर भाजपा के कोर वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश कर रहे हैं. पंकज चौधरी को आगे करके भाजपा ने इस रणनीति को कुंद करने का प्रयास किया है, खासकर पूर्वी यूपी में जहाँ कुर्मी वोट निर्णायक साबित होते हैं.
संगठनात्मक कौशल: सात बार के सांसद और मेयर के रूप में उनके पास लंबा संगठनात्मक और प्रशासनिक अनुभव है, जो उन्हें पार्टी संगठन को 2027 के विधानसभा चुनावों के लिए तैयार करने में मदद करेगा.
